प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़िल्म अभिनेता अक्षय कुमार को एक इंटरव्यू दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के ज़रिये देश के ज़्यादातर समाचार चैनलों पर 67 मिनट का यह इंटरव्यू प्रसारित किया गया.
प्रधानमंत्री आवास पर हुए इस इंटरव्यू में अक्षय ने नरेंद्र मोदी से उनकी दिनचर्या, खान-पान की आदतों, पसंद और बचपने के क़िस्सों पर सवाल पूछे हैं.
अक्षय ने इसे ग़ैर-राजनीतिक साक्षात्कार बताया है. इस पर प्रधानमंत्री ने भी इंटरव्यू के दौरान ही ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि चुनावी समय में वो एक ग़ैर-राजनीतिक साक्षात्कार दे रहे हैं.
सोशल मीडिया पर यह इंटरव्यू ट्रेंड कर रहा है. लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं, प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व की प्रशंसा कर रहे हैं, मज़ेदार टिप्पणियां कर रहे हैं और आलोचनाएं भी कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि चुनावी समय में एक ग़ैर-राजनीतिक इंटरव्यू के भी राजनीतिक असर हो सकते हैं.
ट्विटर यूज़र वैशाली ने लिखा है, ''इस तरह मोदी ख़ुद का प्रचार करते हैं. ख़ुद का प्रचार करने का ये शर्मनाक तरीका है.''
शशांक ने कुछ ऐसा ही लिखा है. उन्होंने ट्वीट किया है, ''इस इंटरव्यू से बेहतर होता कि मोदी जी पर बनी फ़िल्म रिलीज़ कर दी जाती. चल क्या रहा है देश में भाई?''
अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री से इस तरह के सवाल भी पूछे हैं कि 'वो आम काटकर खाते हैं या गुठली के साथ' या 'ज़ुकाम होता है तो आप क्या लेते हैं?'
अक्षय ने जब उनसे पूछा कि क्या कभी उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बारे में सोचा था तो उन्होंने कहा, "कभी नहीं सोचा था. जिसका फ़ैमिली बैकग्राउंड हो उसके मन में इच्छा जगती हो तो सामान्य बात है. मैं जिस बैकग्राउंड से हूं. अगर मुझे कहीं सामान्य नौकरी भी मिल जाती तो मेरी मां पड़ोसियों को गुड़ खिला देती. तो मेरी दृष्टि से सब अप्राकृतिक रहा है."
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की उस टिप्पणी की भी चर्चा है जो उन्होंने अक्षय की पत्नी ट्विंकल खन्ना पर की. उन्होंने कहा, "मैं सोशल मीडिया ज़रूर देखता हूं, इससे मुझे बाहर क्या चल रहा है इसकी जानकारी मिलती है. मैं आपका भी और टविंकल खन्ना जी का भी ट्विटर देखता हूं और जिस तरह वो मुझ पर ग़ुस्सा निकालती हैं तो मैं समझता हूं कि इससे आपके परिवार में बहुत शांति रहती होगी."
इस पर टि्वंकल खन्ना ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा है, ''मैं इसे सकारात्मक तरीके से देखती हूं - प्रधानमंत्री ना केवल मेरे वजूद के बारे में जानते हैं बल्कि मेरा लिखा पढ़ते भी हैं.''
अक्षय ने उनसे यह भी पूछा कि इतने बड़े घर में आपको अपने परिवार को लाने का मन नहीं करता. इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वह बहुत कम उम्र में सब कुछ छोड़ चुके हैं और 'उनकी ज़िंदग़ी डिटैच' हो चुकी है.
उन्होंने कहा, "एक बार मां को बुला लिया था मैंने. पर मां कहती हैं कि तुम मेरे पीछे क्यों परेशान होते है. मैं भी समय नहीं दे पाता था. रात को 12 बजे आता था तो मां को लगता था कि मैं क्या कर रहा हूं."
अक्षय ने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या विपक्ष में उनके दोस्त हैं. इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत दोस्त हैं और हम साल में कभी-कभी खाना-पीना भी करते हैं.
उन्होंने कहा, "एक पुरानी बात है, जब मैं मुख्यमंत्री भी नहीं था. मैं और ग़ुलाम नबी गप्पे मार रहे थे. किसी ने कहा कि आप कैसे दोस्त हैं. तो ग़ुलाम नबी ने अच्छा जवाब दिया."
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शायद आपको हैरानी होगी और शायद इस बात से मुझे चुनाव में नुकसान भी हो सकता है लेकिन ममता दीदी आज भी साल में एक-दो कुर्ते मुझे दे जाती हैं.
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश दौरे पर प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से बंगाली मिठाइयों की चर्चा हुई. तो आज भी वो ढाका से मुझे मिठाइयां भेज देती हैं. ममता दीदी को पता चला तो वो भी साल में कभी कभी मिठाई भेज देती हैं."
ट्विटर यूज़र साकेत रंजन ने इस पर लिखा है, ''ममता दीदी के भेजे कुर्ते नेशनलिस्ट हैं, लेकिन ममता दीदी एंटी-नेशनल हैं.''
इस इंटरव्यू की आलोचना करने वालों में शुमार ने लिखा है, ''इस इंटरव्यू में भक्तों को भले ही कुछ मिल जाए, जनता के मतलब का कुछ नया नहीं था.''
अपने काम करने के तरीक़े पर प्रधानमंत्री ने कहा, "सख्ती अनुशासन थोपने से नहीं आती. ह्यूमन रिसोर्स में ही मैंने ज़िंदगी खपाई है. आप झूठ बोलकर लंबे समय तक लोगों को प्रभावित भी नहीं कर सकते."
मोदी ने सुनाया चुटकुला
प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां तक ह्यूमर की बात है बचपन में वह कैसे भी माहौल को हल्का कर सकते थे. लेकिन अब उनके मुताबिक, "हर चीज़ का अलग अर्थ निकाला जाता है. इसलिए डर लगता है. सोशल मीडिया के बजाय, ये टीआरपी वाले ज़्यादा करते हैं."
उन्होंने कहा, "मेरी कैबेनिट मीटिंग में मैंने दोस्ताना माहौल रखा है. उन्हें चुटकुले सुनाता रहता हूं."
प्रधानमंत्री ने अक्षय कुमार को एक चुटकुला भी सुनाया. उन्होंने कहा, "एक बार हमारे यहां ट्रेन आई. ऊपर एक यात्री सोया हुआ था. उसने पूछा कि कौन सा स्टेशन है. किसी ने कहा कि चार आना दोगे तो जवाब दूंगा. वो बोला, जवाब की ज़रूरत नहीं है, अहमदाबाद ही होगा."
प्रधानमंत्री ने एक समाजवादी नेताओं पर भी एक चुटकुला सुनाया. उन्होंने कहा, "एक बार मैं पुणे स्टेशन पर उतरा. मैं पैदल जा रहा था. एक ऑटो रिक्शा वाला धीरे धीरे साथ चलने लगा. मैंने उससे पूछा तो वो बोला, आप बैठोगे नहीं क्या. आप समाजवादी नहीं हो? मैंने कहा नहीं मैं तो अहमदाबादी हूं. समाजवादी लोग दुनिया को दिखाने के लिए स्टेशन से उतरकर रिक्शा नहीं लेते थे, थोड़ी दूर जाकर लेते थे, ताकि लोगों को लगे कि मेहनत करते हैं. "
प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि उनके साढ़े-तीन चार घंटे सोने की बात सही है. उन्होंने कहा, "मेरे जितने साथी हैं, उन सबका आग्रह यही रहता है है. ओबामा भी मिले तो इसी में उलझे कि क्यों ऐसा करते है. हम अच्छे दोस्त हैं वो मुझसे तू-तू करके बात करते हैं. वो बोले कि तू क्यों ऐसा करता है. पर पता नहीं कि मेरा बॉडी साइकल ऐसा हो गया है. मेरी नींद इतनी देर में पूरी हो जाती है. मैं आंखें नहीं मलता, शरीर अंगड़ाई नहीं लेता, उठते ही मेरा पांव ज़मीन पर पहुंच जाता है."
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